सीएमएचओ ने अस्पतालों में व्यवस्थाएं पूरी रखने के दिए निर्देश
फलोदी(पारस लूंकड़)। गर्मी की शुरुआत के साथ चिकित्सा स्वास्थ्य एवं विभाग की तरफ से लागों को गर्मी की चपेट से बचाने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। साथ ही जिले के सभी अस्पतालों में व्यवस्थाएँ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। सीएमएचओ डॉ. अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि इन दिनों सुबह के साथ ही सूर्य रौद्र रुप लेना शुरु कर देता है। तापमान 42-43 डिग्री तक पहुंच गया है, आने वाले दिनों में तापमान में बढ़ोतरी तय है। गर्मी को देखते हुए जिले के सभी अस्पतालों में रोगियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, संस्थान में रोगी के उपचार के लिए आपातकालीन किट में ओआरएस, द्विपसेट सहित अन्य आवश्यक दवाइयां रखने के निर्देश दिए गए हैं।
लू-तापघात के लक्षण और बचाव
डॉ.अग्रवाल ने बताया कि शरीर में लवण व पानी अपर्याप्त होने पर विषम गर्म वातावरण में लू तापघात हो जाता है जिससे 1. सिर में भारीपन व अत्यधिक सिरदर्द होना। 2. अधिक प्यास लगना। 3 शरीर में भारीपन थकावट। 4. जी मचलाना। 5. सिर चकराना। 6. शरीर का तापमान बढ़ना। 7. पसीना आना बंद होना। 8 मुंह का लाल हो जाना। 9. उल्टी होना। 10. बेहोशी जैसी स्थिति होना आदि लक्षण आने लगते है।
उपचार
1.रोगी को तुरंत छायादार जगह पर कपड़े ढीले कर लेटा दिया जाना चाहिए। 2. रोगी को बेहोशी में जाने से रोकने के लिए ठंडा पेय पदार्थ, जीवनरक्षक घोल, कच्चा आम का पन्ना दें। यदि उक्त उपचार के बाद भी मरीज ठीक नहीं होता है तो उसे तत्काल निकट के चिकित्सा संस्थान में ले जाए। अग्रवाल ने बताया है कि जहां तक संभव हो धूप में नहीं निकलें, धूप में शरीर पूर्ण रुप से ढका हो, धूप में बाहर जाते समय सफेद या हल्के रंग के ढीले व सूती कपडों का उपयोग करें। बहुत अधिक भीड़ व गर्म घुटन भरे कमरों से बचे। बिना भोजन किए बाहर ना निकले। रंगीन चश्मे व छतरी का उपयोग करें। गर्मी में हमेशा पानी अधिक मात्रा में पिएं एवं पेय पदार्थों जैसे नारियल पानी, ज्यूस आदि का प्रयोग करें।
अधिक गर्मी में प्रायः हाई रिस्क श्रेणी वाले लोग जैसे कुपोषित बच्चों, वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं व शुगर, बी.पी., हृदय आदि के मरीज अत्यधिक प्रभावित होते है, यथा संभव इन्हें बाहर नहीं निकलने दें। स्वास्थ्य संबंधी जरुरत होने पर तत्काल 108 को कॉल करें या मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर लेकर जाए। गर्मी के मौसम में लू-तापघात से बचाव के लिए जिला अस्पताल में डेडीकेटेड वार्ड बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जिले के समस्त अस्पतालों व एंबुलेंसों को लू-तापघात से बचाव के लिए एलर्ट मोड़ पर रखा गया है व जिला स्तरीय रेपिड रेस्पोंस टीम का गठन किया गया है।



