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राजस्थानी भाषा के मूर्धन्य विद्वान प्रो. सोनाराम नहीं रहे

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मधुहीर राजस्थान
जोधपुर। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष एवं जाम्भाणी साहित्य अकादमी के संस्थापक सदस्य, राजस्थानी के मूर्धन्य विद्वान प्रो. डॉ. सोनाराम बिश्नोई का निधन हो गया है। अंतिम संस्कार पैतृक गांव भोजाकोर में किया गया।
वे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग के पूर्व अध्यक्ष रहे थे। प्रो. बिश्नोई केंद्रीय साहित्य अकादमी के राजस्थानी प्रकोष्ठ के संयोजक भी रहे थे। साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, राज्य लोक सेवा आयोग सहित अनेक महत्त्वपूर्ण संस्थानों के वर्षों तक परीक्षक रहे। सुघड़ लेखक ओजस्वी वक्ता के साथ साथ प्रसन्न चित्त छवि वाले साहित्य मर्मज्ञ के रूप में आपकी विशेष पहचान रही है। जांभाणी साहित्य अकादमी के कार्यकारिणी सदस्य डॉ भंवरलाल उमरलाई ने बताया कि उनका निधन न केवल मारवाड़ की साहित्यिक,सांस्कृतिक निधि की क्षति है बल्कि समूचे साहित्य जगत लिए विशेष रूप से राजस्थानी भाषा, इतिहास, साहित्य एवं संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति है।

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