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जैसलमेर जिले में सेवन घास-पवन और सौर ऊर्जा की भेंट चढ़ी

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जैसलमेर। जिले में पशुओं के लिए अमृत तुल्य सेवन घास बाहुल्य क्षेत्र पवन और सौर ऊर्जा कंपनियों को आवंटित करने से पशु पालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। जैसलमेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पशु पालन एक मुख्य व्यवसाय हैं। आज भी कई परिवार पशु पालन पर आत्मनिर्भर हैं। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने 15 साल पूर्व डेयरी शिलान्यास कार्यक्रम में पशु पालन को जैसलमेर जिले का मुख्य व्यवसाय माना था। इस दौरान उन्होंने जिले वासियों का आव्हान डेयरी व्यवसाय के लिए किया था। परन्तु गहलोत सरकार द्वारा ही जिले के सेवन घास बाहुल्य क्षेत्र,ओरण, सिवायचक भूमि का आवंटन पवनऔर सौर ऊर्जा कंपनियों को किया जाने से पशुओं के मुंह का निवाला छिन गया हैं। पूर्व कलैक्टर गिरीराजसिंह कुशवाहा एवं पूर्व मुख्य सचिव एस अहमद द्वारा पवन ऊर्जा कंपनियों को सेवन घास क्षेत्र में भूमि आवंटन पर रोक लगाने की कार्रवाई प्रारम्भ की थी। लेकिन तत्कालीन क्षेत्रीय सांसद हरीश चौधरी की सिफारिश पर धडल्ले से ओरण, गोचर भूमि विंड मिलों को आवंटित की गई । जिससे अब पशुओं को अमृत तुल्य सेवन दिखने को भी नहीं मिल रही हैं। वर्तमान सरकार द्वारा सेवन सरंक्षण के लिए कोई ध्यान नहीं दिए जाने से आगामी दिनों में चारे का ‘संकट बढ़ने की आशंका हैं। पशु पालकों के पास चारे का भण्डारण कम होने लगा हैं।

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